वो रोते रही और हम सुनते रहे
वो सिसकती रही, हम पिघलते रहे,
हाय कैसी हैं किस्मत... रब तुम ही कहो
पास होकर भी हैं दूर कितने... ये तुम ही कहो
मेरे मौला ये तुमने सितम क्यू हैं ढाई
उनकी आँखों मे इतनी नमी क्यू हैं आई..
होता जो साथ उसके तो बुँदे निकलने न देता,
निकल भी अगर जाता तो गिरने न देता..
मगर मैं यूँ बैठा पागल न बनता
थाम बाँहों में उसको बस आंहे ही भरता..
सजा किस जनम की दिए जा रहे हो .....
मेरे खुदा बस मेरे जान लिए जा रहे हो ....
वो सिसकती रही, हम पिघलते रहे,
हाय कैसी हैं किस्मत... रब तुम ही कहो
पास होकर भी हैं दूर कितने... ये तुम ही कहो
मेरे मौला ये तुमने सितम क्यू हैं ढाई
उनकी आँखों मे इतनी नमी क्यू हैं आई..
होता जो साथ उसके तो बुँदे निकलने न देता,
निकल भी अगर जाता तो गिरने न देता..
मगर मैं यूँ बैठा पागल न बनता
थाम बाँहों में उसको बस आंहे ही भरता..
सजा किस जनम की दिए जा रहे हो .....
मेरे खुदा बस मेरे जान लिए जा रहे हो ....
