उनको भी हमसे मुहब्बत हो जरुरी तो नहीं

उनको भी हमसे मुहब्बत हो जरुरी तो नहीं
एक सी दोनों की हालत हो जरुरी तो नहीं.......

बदली बदली सी नजर आती हैं दुनिया हमको
इसमें उनकी भी इनायत हो जरुरी तो नहीं....

एक सी दोनों की हालत हो जरुरी तो नहीं.......
उनको भी हमसे मुहब्बत हो जरुरी तो नहीं

जिसको कहते हैं मुहबत हैं खुदा की निमत
सबकी किस्मत में ये दौलत हो जरुरी तो नहीं.....

एक सी दोनों की हालत हो जरुरी तो नहीं.......
उनको भी हमसे मुहब्बत हो जरुरी तो नहीं

चाँद छुने की तम्मना तो हैं हमको भी मगर
दूर का चाँद हकीकत हो जरुरी तो नहीं.....

उनको भी हमसे मुहब्बत हो जरुरी तो नहीं

तो मैं क्या करूँ......

मस्जिद तो बना दी सबभर (रात भर) में इमाम की हरारत वालों ने
मन अपना पुराना पापी हैं, बरसों में नमाजी बन ना सका, तो मैं क्या करूँ......

बेवफ़ा के नाम से बदनाम हुए हम..

एक खुशी के लिए हर खुशी से दूर हुए हम,
कुछ कह भी न सके उनको इतने मजबूर हुए हम.......
निभाने आई न उनको वफ़ा......
और बेवफ़ा के नाम से बदनाम हुए हम.......

बेवफ़ा

हाँ! मुझे रस्म-ए-मोहब्बत का सलीक़ा ही नहीं;
जा! किसी और का होने की इजाज़त है तुझे।

फिर से निकलेंगे तलाश-ए-ज़िंदगी में;
दुआ करना इस बार कोई बेवफ़ा ना मिले।