एक सच

मैंने कभी घर बयांवा (रेगिस्तान) मे बनाया नहीं.......और जिसे घर समझा वो बयांवा निकला......

आ दिल मे तुझे रख लू

आ दिल मे तुझे रख लू ए मेरे दिल ऐ जाना

इतना तो कर्म करना..........

जब जान लबो पर हो तू सामने आ जाना 

आ दिल मे तुझे रख लू ए मेरे दिल ऐ जाना

जी चाहता हैं तोहफे मे भेजू तुम्हे मैं अपनी आँखे

दर्शन का तो दर्शन हो, नजराने का नजराना

आ दिल मे तुझे रख लू

मैं होश हवास अपने इस बात पर खो बैठा

हँस कर जो कहाँ तुने.. आया मेरा दीवाना

आ दिल मे तुझे रख लू

दुनिया मे जब तुने मुझे  अपना बनाया हैं

तो मेह्सल (सभी के बीच ) मे भी कह देना.....ये हैं मेरा दीवाना

क्यू आँख मिलाई थी क्यू आग लगाई थी

अब अपना चेहरा छुपा बैठे.... कर के मुझे दीवाना

आ दिल मे तुझे रख लू

पीने का तो पी लूँगा बस सर्त जरा सी हैं....

सिंघेश्वर का मयखाना हो और देवघर का पिलाने वाला 

आ दिल मे तुझे रख लू
______________________________