मैंने कभी घर बयांवा (रेगिस्तान) मे बनाया नहीं.......और जिसे घर समझा वो बयांवा निकला......
आ दिल मे तुझे रख लू
आ दिल मे तुझे रख लू ए मेरे दिल ऐ जाना
इतना तो कर्म करना..........
जब जान लबो पर हो तू सामने आ जाना
आ दिल मे तुझे रख लू ए मेरे दिल ऐ जाना
जी चाहता हैं तोहफे मे भेजू तुम्हे मैं अपनी आँखे
दर्शन का तो दर्शन हो, नजराने का नजराना
आ दिल मे तुझे रख लू
मैं होश हवास अपने इस बात पर खो बैठा
हँस कर जो कहाँ तुने.. आया मेरा दीवाना
आ दिल मे तुझे रख लू
दुनिया मे जब तुने मुझे अपना बनाया हैं
तो मेह्सल (सभी के बीच ) मे भी कह देना.....ये हैं मेरा दीवाना
क्यू आँख मिलाई थी क्यू आग लगाई थी
अब अपना चेहरा छुपा बैठे.... कर के मुझे दीवाना
आ दिल मे तुझे रख लू
पीने का तो पी लूँगा बस सर्त जरा सी हैं....
सिंघेश्वर का मयखाना हो और देवघर का पिलाने वाला
आ दिल मे तुझे रख लू
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