दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है मुझे;
जैसे-जैसे दोस्तों को आज़माते जा रह हूं मैं...
यूँ ही रखते रहे बचपन से दिल साफ़ हम अपना;
पता नहीं था कि कीमत तो चेहरों की होती है दिल की नहीं..
कम से कम तन्हाई तो साथी है;
अपनी जिंदगी के हर एक पल की;
चलो ये शिकवा भी दूर हुआ कि;
किसी ने साथ नहीं दिया।