मैं हमेशा तुम्हें मिस करता हूँ
तो मैं क्या करूँ......
मस्जिद तो बना दी सबभर (रात भर) में इमाम की हरारत वालों ने
मन अपना पुराना पापी हैं, बरसों में नमाजी बन ना सका, तो मैं क्या करूँ......
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