कुछ एसे..........

सोचा था मैंने की जियेंगे जिंदगी....... कुछ एसे.......... 

तेरे खुशियों की खातिर लड़ेंगे सबों से ........कुछ एसे...........

तुम तकते रहती मेरी राह और मैं तेरे लिए भागता आता.........

थका हुआ सा मैं तेरे बाहों को तकिया बना फिर सोता........... कुछ एसे.............

आँखे खुलते ही तेरे चेहरे को देख

मेरी लबो पर आती मुस्कान......... कुछ एसे...............

ये तो सपना था मेरा तेरे साथ जीने का

वजह क्या हुई जो ये पूरा न हो सका..................

हाँ, सच मे घरोंदा था ये मेरा शुष्क मिटटी का बना

मेरे ही आंसूओं से ये बहता चला गया.................

जीना तो होगा ही मुझे तेरे बिना भी यहीं

मगर तेरे बिना मेरी जिंदगी क्या होगी......बस डरता हूँ........... कुछ एसे