अधूरी सी सही

कुछ बात थी जो अधूरी रह गयी
एक मुलाक़ात थी जो अधूरी रह गयी
पहले तो डरा
फिर सहमा
तब याद आयी
ये तो मेरी तक़दीर थी
जो पूरी ना हो सकी।

हर साँस
हर धड़कन
हर बूँद ख़ून पर था जिनका नाम
वो शक्स ही क्यूँ बस
मुझसे दूर हो गई।

अधूरा तो शब्द ही हैं “प्रेम” का
अधूरा हैं इश्क़ कृष्ण का
अधूरा हैं चाँद पूनम की
अधूरा हैं राग जश्न का
फिर हम क्या?
मेरी बिसात क्या ?
फिर तुम ही क्या?
फिर मेरी जज़्बात क्या ?

चलो अधूरे ही सही
इस बार कुछ बटें ही सही
एक बग़ल में हम तो होंगे
एक बग़ल में तुम……………
अधूरी सी सही