हाँ! मुझे रस्म-ए-मोहब्बत का सलीक़ा ही नहीं;
जा! किसी और का होने की इजाज़त है तुझे।
फिर से निकलेंगे तलाश-ए-ज़िंदगी में;
दुआ करना इस बार कोई बेवफ़ा ना मिले।
जा! किसी और का होने की इजाज़त है तुझे।
फिर से निकलेंगे तलाश-ए-ज़िंदगी में;
दुआ करना इस बार कोई बेवफ़ा ना मिले।